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सल्तनत ए 🗡️उस्मानिया भाग-३

मुसलमान जबसे दीन के  रास्ते से दूर हुवे तो गुलामी ओर ज़िल्लत उन का मुकद्दर बन गई , हमारा माज़ी हमारी पहचान हे तारीख़े इस्लाम मे खुल्फाए-राशेदीन के बाद बोहोत से मुजाहिदे इस्लाम गुजरे जो बोहोत मशहूर हे जिन्होंने सलेबियो(ईसाई फ़ौज़) के दाँत खट्टे किएइनमे सुल्तान सलाउद्दीन अयूबी , सुल्तान नूरुद्दीन जंगी ,रुक्न अल-दीन बेयबर्स, सुल्तान अलप-अरसलान ,वगैराह सामिल हेमें तारीख़े इस्लाम से एक ऐसे अज़ीम मुजाहिद का जिक्र  करने जा रहा हु जिनके नाम से बोहोत कम लोग वाकिफ हे जिन्होंने मुसलमानो की आज़ादी की जद्दो-जहद के लिए जिहाद का रास्ता अपनाया और बोहोतसी कुर्बानिया दी और इस तरह मुस्लमानो के लिए एक रोशन दौर का आगाज़ हुवा 

ख़िलाफ़त ए अब्बासिया का खातमा हो चुका था -इस वक़्त तमाम तुर्क काबिलो की सूरत में रहते थेये तमाम काबिले खाना-बदोस थे ये सफर करते और जंग करते सर-सब्ज़ इलाके देखते वहा पर आबाद होजातेउनमे एक काय कबीला था जो अफ़राद के लिहाज से काफी मजबूत ओर ताक़तवर थासुलेमान शाह काय कबीले के सरदार थे जो सच्चे मुसलमान निडर ओर रहमदिल इन्शान थेउनके मक़ासिद में इस्लाम की ईशाअत ओर इंसाफ का बोल-बाला करना शामिल था ,क्यों के ये वो वक़्त था जब मुसलमान हर जगह कमजोरी का शिकार थे

मंगोल हलाकू खान की सरबराइ बढ़ते चले आरहे थे, ओर ख़िलाफ़ते अब्बासिया  के बाद सल्जूक सल्तनत इनकी मंजिल थी , तो उधर सलेबी अपनी सजिसो के जाल बन रहे थे_मुसलमानो की मजबूत और ताक़तवर सल्जूक सल्तनत अपने जावाल के करीब थी, इन हालात में जरूरी था कि मुसलमान की तादाद को बढ़ाया जाए , सरदार सुलेमान शाह के 4 बेटे थे जो बोहोत बहादुर जंगजू थे,, सुलेमान शाह तमाम तुर्क कबीलो को मुत्तहिद करना चाहते थे, ,ताके मुसलमानो को सलेबियो की सजिसो ओर धोको से बचाया जा सके

शाम के इलाकों पर सुल्तान सलाउद्दीन अयूबी के पोते सुल्तान मलिक अल-अज़ीज़ अयूबी की हुकूमत थी,जबकि अनातोलिया में सल्जूक सुल्तान अलाउद्दीन कयकबाद की हुकूमत थी_सलेबी दोनो सुल्तानों को आपस मे लड़ाना चाहते थे ताके इस खित्ते में मुसलमानो को कमजोर करके उनका खत्मा किया जा सके

सरदार सुलेमान शाह ने उन सजिसो को खत्म करने में बड़ा किरदार अदा किया जिसकी वजह से अय्यूबी सुल्तान काय कबीले के दोस्त बन गए_और सलजुक सुल्तान की भतीजी हलीमा सुल्तान की सुलेमान शाह के बेटे अल-तुगरल से शादी होगई ,सरदार सुलेमान शाह की वफात के बाद अल-तूगरल जो ,अरतगल, के नाम से मसहूर हे काय कबीले के सरदार बने वो बोहोत जाहिन बेहतरीन जंगजू थे

गाज़ी अरतगल (eurtgul) ने सरदार बनने बाद सलेबियो का डट कर मुकाबला किया उनकी सजिसो को ना-काम किया और उनके मशहूर किले कारह-चहिसर को फतह किया, बहादुरी सुजाअत ओर वफ़ा-दारी की वजह से सुल्तान अलाउद्दीन ने अरतगल गाज़ी को अगुज़ कबाइल का सरदार ए आला ओर अनातोलिया के सरहदी इलाके , जो बेजन्टइन के करीब थे , का निगरान बना दिया अरतगल गाज़ी के यहा 3 बेटे  सुलेमान , गुन्दूज अल्प, सरु बाटी सभिसी बे, पैदा हुवे

उस्मान सब भाइयो में छोटे थे ,अरतगल गाजी ने उनकी दीनी ओर जंगी तरबियत की ,ओर वो बड़े होकर वालिद के शाने-ब-शाने जिहाद में शामिल होते रहे -अरतगल गाज़ी एक मकसद के लिए लड़ रहे थे उन्होंने मंगोलो के बड़े बड़े सिपाह सालार क़त्ल किए जिनमे नुयान ओर अलनचक मशहूर हे

सल्जूक सल्तनत मंगोलो के हाथो खत्म हो चुकी थी ,ओर अरतगल गाज़ी ने तमाम तुर्क कबीलो को सुगुत में इकट्ठा किया, सलेबियो (ईसाई फ़ौज़ का नाम)  से छीने गए इलाको को एक रियासत की सकल दी,ओर तालीम व तरबियत के लिए दरसगाह तामीर की,ताके लोग जदीद उलूम से बेहरावर हो और इस तरफ मजबूत इस्लामी मुहासरे की बुन्याद रखी जा सके

अरतगल गाज़ी ने मंगोलो का खत्मा करने के लिए फैसला कुन जंग का इरादा किया ओर इस मकसद के लिए मंगोल सुल्तान बरका खान जो मुसलमान हो चुके थे और मिस्र के सुल्तान रुक्न अल-दीन बेयबर्स को अमादा किया ओर तेय पाया कि एक बड़ी फ़ौज़ तैयार की जाए जिसमे तमाम तुर्क कबाइल भी शामिल हो, अनातोलिया में फैसलाकुन जंग का आगाज़ किया गया ,


दोस्तो हलाकू खान जैसे जालिम का दौर कितना मुश्किल होगा आप अंदाजा हो गया होगा बगदाद की तबाही चारो तरफ से हमले _सलेबी मंगोल ओर तन्हा मुसलमान और वो भी कमजोर कभी उस वक़्त को याद करे और फिर आज के वक़्त को याद करे तो आज का वक़्त उसके मुकाबले में कुछ भी नही ,

जो कोहे सितम उधर टुटे, लेकिन दोस्तो सलाम हे उन जाबाज़ों को जिन्हें अल्लाह पे ऐसा ईमान था कि उन्होंने अपनी जिंदगी का एक ही मक़सद बनाया मुसलमान को मंगोलो ओर सलेबियो के जुल्म से बचाना हे, वो थोड़े ही थे लेकिन उनका जस्बा लाखो पे भारी था

उस वक़्त अगर गाज़ी अरतगल सिर्फ अपने काबिले की सोचते ओर मुसलमानो के लिए खड़े नही होते तो आज तुर्की अनातोलिया बर्जेन्टाइन रूमियों ही रहता , कुस तुंतुनिया इस्ताम्बुल नही बनता , ओर बगदाद फिर से आबाद नही होता
अरतगल गाज़ी ने मंगोलो का खत्मा करने के लिए फैसला कुन जंग का इरादा किया ओर इस मकसद के लिए मंगोल सुल्तान बरका खान जो मुसलमान हो चुके थे और मिस्र के सुल्तान रुक्न अल-दीन बेयबर्स को अमादा किया ओर तेय पाया कि एक बड़ी फ़ौज़ तैयार की जाए जिसमे तमाम तुर्क कबाइल भी शामिल हो, अनातोलिया में फैसलाकुन जंग का आगाज़ किया गया , इस जंग में मंगोलो को इबरतनाक शिकस्त हुई और मुसलमान फतेहयाब हुवे,

हलाकू खान की मौत कैसे हुई

जहा मेने इसके जुल्म बताए वही इस जालिम का अनजाम भी देखे

इसकी मोत इबरत नाक मोत हे। एक दिन हलाकू अपने घोड़े पे शान से बैठा हुवा था, चारो तरफ तातारी फ़ौज़ थी, हलाकू खान के हुक्म पे  लोगो की को कत्ल करने के लिए सब लगाई गई  3 सब लगाई जिसमे लोग खड़े थे हलाकू की जल्लाद एक एक कर उनके सर कलम कर रहा था

हलाकू खान घोड़े पे बैठ इस का लुत्फ ले रहा था, उसको मरते लोगो को देखने का शोक था, आज भी वो यही कर रहा था _जल्लाद ने पहली सब को कत्ल करना सुरु किया एक एक कर सब की गर्दन कट रही थी, इस सब मे एक बूढ़े बाबा थे जो पहली सब से हट के दूसरी सब मे खड़े हो गए जान बचाने के लिए , जब दूसरी सब की बारी आई तो ये तीसरी में खड़े हो गए, ,हलाकू ये मन्ज़र देख रहा था, उसके  हाथ मे नीबू था जिसे उछाल के खेल रहा था ,, जैसे तीसरी सब की गर्दन कटना सुरु हुई , ओर ये बूढ़े बाबा की बारी आई जल्लाद ने पकड़ा हलाकू ने आवाज़ लगाई रुको

कहा बाबा आज तक मुझसे कोई बचा नही ,,ओर अब तो कोई दूसरी सब भी नही अब कैसे बचोगे अब मेरी तलवार से तुम्हे कोन बचाएगा ,,उस बूढ़े बाबा ने आसमान की तरफ देखा और कहा अगर वो चाहे तो इन्किलाब आ सकता हे ,,एक पल में मुझे बचा सकता हे_हलाकू ने सुना तो बोहोत जोर से झुंझलाया , की उसके हाथ से नीबू छूट गया , उसने फ़ौरन घोड़े पे बैठे हुवे ही, नीबू पकड़ने की कोसिस की  इस कोसिस में उसका एक पेर रकाब से निकल गया ,ओर वो गिर गया, हलाकू का दुसरा पेर रकाब में फस गया ,हलाकू के गिरते ही घोड़ा डर गया और भागने लगा ,,हलाकू को घसीटता हुवा ले गया , हलाकू की फ़ौज़ उसके पीछे दौड़ी , लेकिन घोड़ा इतना डर गया कि वो नही रुका भगता रहा ,पत्थर से पिट पिट कर हलाकू की मौत होगई जब उसकी सेना पोहची तो हलाकू मर चुका था

इसके बाद उस बूढ़े से सेना डर गई और इसका नज़र अंदाज़ कर दिया


गाज़ी अरतगल सलेबियो ,ओर मंगोलो को इस इलाके से निकलने में कामयाब हो गए -, सुगुटअब एक रियासत बन चुकी थी , गाज़ी अरतगल के वफात के बाद उनके छोटे बेटे उस्मान काय काबिले के सरदार बने और रियासत सुगुट मजबूत करते रहे
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📮आगे इन शा अल्लाह अगली पोस्ट में

✍🏻मोहम्मद शोएब

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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