इस्लाम से जुड़े कुछ सवाल जवाब
*सवाल:-* अल्लाह पाक ﷻ के बारे में कैसा अकीदा रखना चाहिए ?
*जवाब:-* अल्लाह पाक ﷻ एक है उसका कोई शरीक नहीं है यानी पार्टनर नहीं है। आसमान और जमीन में सारी माखलूकौं का पैदा करने वाला वही है वही इबादत के लायक है दूसरा कोई मुसतहिके इबादत नहीं । वही अल्लाह ﷻ है जो सबको रोजी देता है। अमीरी गरीबी और इज्ज़त व ज़िल्लत सब उसके इख्तियार में है जिसे चाहता है इज्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत देता है। उसका हर काम हिकमत है। बन्दों की समझ में आए या ना आए वह कमाल व खूबी वाला है । झूठ" दगा" खयानत" ज़ुल्म व जहल वगैरा हर ऐब से पाक है उसके लिए किसी ऐब का मानना कुफ्र है लिहाज़ा जो यह माने या अकीदा रखें के खुदा ए पाक झूठ बोल सकता है वह गुमराह/बद-मज़हब है। यानी मुसलमान नहीं है
( अनवारे शरीयत पेज: 6 )
*जवाब:-* अल्लाह पाक ﷻ एक है उसका कोई शरीक नहीं है यानी पार्टनर नहीं है। आसमान और जमीन में सारी माखलूकौं का पैदा करने वाला वही है वही इबादत के लायक है दूसरा कोई मुसतहिके इबादत नहीं । वही अल्लाह ﷻ है जो सबको रोजी देता है। अमीरी गरीबी और इज्ज़त व ज़िल्लत सब उसके इख्तियार में है जिसे चाहता है इज्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत देता है। उसका हर काम हिकमत है। बन्दों की समझ में आए या ना आए वह कमाल व खूबी वाला है । झूठ" दगा" खयानत" ज़ुल्म व जहल वगैरा हर ऐब से पाक है उसके लिए किसी ऐब का मानना कुफ्र है लिहाज़ा जो यह माने या अकीदा रखें के खुदा ए पाक झूठ बोल सकता है वह गुमराह/बद-मज़हब है। यानी मुसलमान नहीं है
( अनवारे शरीयत पेज: 6 )
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*अनवारे शरीयत* उन्वान *फ़रिश्ते* पेज:7
*अनवारे शरीयत* उन्वान *फ़रिश्ते* पेज:7
========= *फ़रिश्ते* =========
*सवाल:-* फरिश्ते क्या चीज़ हैं ?
*जवाब:-* फरिश्ते इंसान की तरह एक मखलूक हैं लेकिन वह नूर से पैदा किए गए हैं ना तो वह मर्द हैं ना औरत हैं ना कुछ खाते हैं ना पीते हैं जितने काम अल्लाह पाक ﷻ ने उनके सुपुर्द कर दिए हैं उसी में लगे रहते हैं। कुछ फरिश्ते बंदों का अच्छा बुरा अमल लिखते हैं जिनको *किरमान कतीबीन* कहा जाता है। कुछ फरिश्ते क़ब्र में मुर्दों से सवाल करने पर मुकर्रर हैं जिन्हें *मुनकर नकीर* कहा जाता है और कुछ फरिश्ते हुज़ूर علیہ السلام के दरबार में मुसलमानों के दुरूदो सलाम पहुंचाने पर मुकर्रर हैं। इनके इलावा और भी बहुत से काम हैं जो फरिश्ते अंजाम देते रहते हैं इन में चार फरिश्ते बहुत मशहूर हैं।
1:- हज़रत जिब्राईल علیہ السلام जो अल्लाह पाक ﷻ के अहकाम (हुक्म—बातें) पैगंबरों ( नबियों ) तक पहुंचाते थे।
2:- हज़रत इस्राफील علیہ السلام जो क़यामत ( जिस दिन ये पूरी दुनिया नष्ट हो जाएगी ) के दिन सूर फुकेंगे।
3:- हज़रत मीकाईल علیہ السلام जो पानी बरसने और रोज़ी पहुंचाने पर मुकर्रर हैं।
4:- हरजत इज़राईल علیہ السلام जो लोगो की जान निकालने पर मुकर्रर हैं।
जो शख्स ये कहे के फरिश्ते कोई चीज़ नहीं या ये कहे के फरिश्ते नेकी की कुव्वत का नाम है तो वह काफिर है। ( मुसलमान नहीं। )
हवाला :- बहारे शारीअत
( अनवारे शरीयत पेज: 7 )
*सवाल:-* फरिश्ते क्या चीज़ हैं ?
*जवाब:-* फरिश्ते इंसान की तरह एक मखलूक हैं लेकिन वह नूर से पैदा किए गए हैं ना तो वह मर्द हैं ना औरत हैं ना कुछ खाते हैं ना पीते हैं जितने काम अल्लाह पाक ﷻ ने उनके सुपुर्द कर दिए हैं उसी में लगे रहते हैं। कुछ फरिश्ते बंदों का अच्छा बुरा अमल लिखते हैं जिनको *किरमान कतीबीन* कहा जाता है। कुछ फरिश्ते क़ब्र में मुर्दों से सवाल करने पर मुकर्रर हैं जिन्हें *मुनकर नकीर* कहा जाता है और कुछ फरिश्ते हुज़ूर علیہ السلام के दरबार में मुसलमानों के दुरूदो सलाम पहुंचाने पर मुकर्रर हैं। इनके इलावा और भी बहुत से काम हैं जो फरिश्ते अंजाम देते रहते हैं इन में चार फरिश्ते बहुत मशहूर हैं।
1:- हज़रत जिब्राईल علیہ السلام जो अल्लाह पाक ﷻ के अहकाम (हुक्म—बातें) पैगंबरों ( नबियों ) तक पहुंचाते थे।
2:- हज़रत इस्राफील علیہ السلام जो क़यामत ( जिस दिन ये पूरी दुनिया नष्ट हो जाएगी ) के दिन सूर फुकेंगे।
3:- हज़रत मीकाईल علیہ السلام जो पानी बरसने और रोज़ी पहुंचाने पर मुकर्रर हैं।
4:- हरजत इज़राईल علیہ السلام जो लोगो की जान निकालने पर मुकर्रर हैं।
जो शख्स ये कहे के फरिश्ते कोई चीज़ नहीं या ये कहे के फरिश्ते नेकी की कुव्वत का नाम है तो वह काफिर है। ( मुसलमान नहीं। )
हवाला :- बहारे शारीअत
( अनवारे शरीयत पेज: 7 )
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*अनवारे शरीयत* उन्वान *अल्लाह पाक ﷻ की किताबें* पेज:7
*अनवारे शरीयत* उन्वान *अल्लाह पाक ﷻ की किताबें* पेज:7
===== *अल्लाह पाक ﷻ की किताबें* =====
*सवाल:-* अल्लाह पाक ﷻ की किताबें कितनी हैं।
*जवाब:-* अल्लाह पाक ﷻ की छोटी बड़ी बहुत सी किताबें नाज़िल हुई हैं बड़ी किताब को किताब और छोटी को सफीहा कहते हैं। इनमें चार किताबें बहुत मशहूर हैं।
1:- तौरैत जो हज़रत मूसा علیہ السلام पर नाज़िल हुई,
2:- जबूर जो हज़रत दाऊद علیہ السلام पर नाज़िल हुई,
3:- इंजीज जो हज़रत ईसा علیہ السلام पर नाज़िल हुई,
4:- *क़ुरान मजीद* जो हमारे नबी ️ *(ﷺ)* पर नाज़िल हुई,
*सवाल:-* अल्लाह पाक ﷻ की किताबें कितनी हैं।
*जवाब:-* अल्लाह पाक ﷻ की छोटी बड़ी बहुत सी किताबें नाज़िल हुई हैं बड़ी किताब को किताब और छोटी को सफीहा कहते हैं। इनमें चार किताबें बहुत मशहूर हैं।
1:- तौरैत जो हज़रत मूसा علیہ السلام पर नाज़िल हुई,
2:- जबूर जो हज़रत दाऊद علیہ السلام पर नाज़िल हुई,
3:- इंजीज जो हज़रत ईसा علیہ السلام पर नाज़िल हुई,
4:- *क़ुरान मजीद* जो हमारे नबी ️ *(ﷺ)* पर नाज़िल हुई,
*सवाल:-* पूरा कुरान मजीद एक दफा में नाज़िल हुआ या थोड़ा-थोड़ा ?
*जवाब:-* पूरा कुरान मजीद एक दफा इकट्ठा नाज़िल नहीं हुआ बल्कि ज़रूरत के मुताबिक 23 साल तक थोड़ा-थोड़ा नाज़िल होता रहा।
*सवाल:-* क्या कुरान की हर सूरत पर ईमान लाना ज़रूरी है?
*जवाब:-* हां कुरान मजीद की हर सूरत और हर आयत पर ईमान लाना ज़रूरी है अगर एक आयत का भी इंकार कर दे या यह कहें के कुरान जैसा नाज़िल हुआ था अब वैसा नहीं है बल्कि घटा या बढ़ा दिया गया है तो वह काफिर है ( मुसलमान नहीं )
हवाला :- बहारे शारीअत
( अनवारे शरीयत पेज: 8 )
*जवाब:-* पूरा कुरान मजीद एक दफा इकट्ठा नाज़िल नहीं हुआ बल्कि ज़रूरत के मुताबिक 23 साल तक थोड़ा-थोड़ा नाज़िल होता रहा।
*सवाल:-* क्या कुरान की हर सूरत पर ईमान लाना ज़रूरी है?
*जवाब:-* हां कुरान मजीद की हर सूरत और हर आयत पर ईमान लाना ज़रूरी है अगर एक आयत का भी इंकार कर दे या यह कहें के कुरान जैसा नाज़िल हुआ था अब वैसा नहीं है बल्कि घटा या बढ़ा दिया गया है तो वह काफिर है ( मुसलमान नहीं )
हवाला :- बहारे शारीअत
( अनवारे शरीयत पेज: 8 )
*अनवारे शरीयत* उन्वान *रसूल और नबी عليه الصلاه والسلام"* पेज:8
=== *रसूल और नबी عليه الصلاه والسلام* ===
*सवाल:-* रसूल और नबी कौन होते हैं ?
*जवाब:-* रसूल और नबी खुदा ए पाक के बंदे और इंसान होते हैं। अल्लाह पाक ﷻ ने इनको इंसान की हिदायत के लिए दुनिया में भेजा है वह बंदों तक खुदा ए पाक ﷻ का पैग़ाम पहुंचाते हैं। चमत्कार दिखाते हैं और अनदेखी बातें बताते हैं, झूठ कभी नहीं बोलते और हर गुनाह से पाक होते हैं, इन की संख्या कुछ एक लाख चोबीस हज़ार के बराबर या तकरीबन दो लाख चोबीस हज़ार है। सबसे पहले नबी हज़रते आदम علیہ السلام हैं। और सबसे आखिरी नबी हमारे पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद मुस्तफा *(ﷺ)* हैं।
*सवाल:-* नबी के नाम पर ( अलय. علیہ Aly. ) लिखना चाहिए या नहीं ?
*जवाब:-* अलेहीस्स सलतो वस्सलाम ( عليه الصلاه والسلام )लिखना चाहिए सिर्फ ( अलय. علیہ Aly. ) लिखना हराम है।
( अनवारे शरीयत पेज: 8 )
*सवाल:-* रसूल और नबी कौन होते हैं ?
*जवाब:-* रसूल और नबी खुदा ए पाक के बंदे और इंसान होते हैं। अल्लाह पाक ﷻ ने इनको इंसान की हिदायत के लिए दुनिया में भेजा है वह बंदों तक खुदा ए पाक ﷻ का पैग़ाम पहुंचाते हैं। चमत्कार दिखाते हैं और अनदेखी बातें बताते हैं, झूठ कभी नहीं बोलते और हर गुनाह से पाक होते हैं, इन की संख्या कुछ एक लाख चोबीस हज़ार के बराबर या तकरीबन दो लाख चोबीस हज़ार है। सबसे पहले नबी हज़रते आदम علیہ السلام हैं। और सबसे आखिरी नबी हमारे पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद मुस्तफा *(ﷺ)* हैं।
*सवाल:-* नबी के नाम पर ( अलय. علیہ Aly. ) लिखना चाहिए या नहीं ?
*जवाब:-* अलेहीस्स सलतो वस्सलाम ( عليه الصلاه والسلام )लिखना चाहिए सिर्फ ( अलय. علیہ Aly. ) लिखना हराम है।
( अनवारे शरीयत पेज: 8 )
*अनवारे शरीयत* उन्वान *हमारे नबी ﷺ "* पेज:9
======== *हमारे नबी ﷺ* ========
*सवाल:-* हमारे नबी ﷺ कौन हैं? उनका कुछ हाल बयान कीजिए?
*जवाब:-* हमारे नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा *(ﷺ)* हैं। जो पीर के दिन 12 रबीउल अव्वल शरीफ मुताबिक। 20 अप्रैल 571 में मक्का में तशरीफ लाए ( पैदा हुए ) इनके वालिद का नाम हज़रत अब्दुल्लाह और वालिदा का नाम हज़रत आमना है ( رضي الله عنه ) आप ﷺ की ज़ाहिर ज़िन्दगी 63 बरस की हुई 53 साल की आयु ( Age ) मक्का शरीफ में रहे फिर 10 साल मदीना तय्यबा में रहे। 12 रबीउल अव्वल 11 हिजरी / 12 जून 632 ईसवी में वफात पाई। आप ﷺ का मज़ारे मुबारक मदीना शरीफ में है जो मक्का शरीफ से तकरीबन 200 मील यानी 320 किलोमीटर के फासले पर है।
हवाला ( फतावा ए राजविया )
*सवाल:-* हमारे नबी ﷺ कौन हैं? उनका कुछ हाल बयान कीजिए?
*जवाब:-* हमारे नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा *(ﷺ)* हैं। जो पीर के दिन 12 रबीउल अव्वल शरीफ मुताबिक। 20 अप्रैल 571 में मक्का में तशरीफ लाए ( पैदा हुए ) इनके वालिद का नाम हज़रत अब्दुल्लाह और वालिदा का नाम हज़रत आमना है ( رضي الله عنه ) आप ﷺ की ज़ाहिर ज़िन्दगी 63 बरस की हुई 53 साल की आयु ( Age ) मक्का शरीफ में रहे फिर 10 साल मदीना तय्यबा में रहे। 12 रबीउल अव्वल 11 हिजरी / 12 जून 632 ईसवी में वफात पाई। आप ﷺ का मज़ारे मुबारक मदीना शरीफ में है जो मक्का शरीफ से तकरीबन 200 मील यानी 320 किलोमीटर के फासले पर है।
हवाला ( फतावा ए राजविया )
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*सवाल:-* क्या हमारे नबी *(ﷺ)* ज़िंदा हैं?
*जवाब:-* हमारे नबी *(ﷺ)* और तमाम अंबियाए किराम علیہ السلام ज़िंदा हैं हदीस शरीफ में है के सरकारे अकदस *(ﷺ)* ने फ़रमाया ان الله حرم على الارض ان تاكل اجساد الانبياء فنبي الله حي يرزق यानी खुदा—ए–पाक ﷻ ने ज़मीन पर अम्बिया–ए–किराम علیہ السلام के जिस्मों को खाना हराम फार्मा दिया है तो अल्लाह पाक ﷻ के नबी علیہ السلام ज़िंदा हैं रोज़ी दिए जाते हैं।
*हवाला* ( मिशकात शरीफ स.121 )
*सवाल:-* जो शख्स अम्बिया–ए–किराम علیہ السلام के बारे में ये कहे के "मर कर मिट्टी में मिल गए" तो उसके लिए क्या हुक्म है ?
*जवाब:-* ऐसा कहने वाला गुमराह बद·मजहब *खब्बीस* है। ( मुसलमान नहीं )
*हवाला* ( बहरे शरीअत )
( अनवारे शरीयत पेज: 10 )
*सवाल:-* क्या हमारे नबी *(ﷺ)* ज़िंदा हैं?
*जवाब:-* हमारे नबी *(ﷺ)* और तमाम अंबियाए किराम علیہ السلام ज़िंदा हैं हदीस शरीफ में है के सरकारे अकदस *(ﷺ)* ने फ़रमाया ان الله حرم على الارض ان تاكل اجساد الانبياء فنبي الله حي يرزق यानी खुदा—ए–पाक ﷻ ने ज़मीन पर अम्बिया–ए–किराम علیہ السلام के जिस्मों को खाना हराम फार्मा दिया है तो अल्लाह पाक ﷻ के नबी علیہ السلام ज़िंदा हैं रोज़ी दिए जाते हैं।
*हवाला* ( मिशकात शरीफ स.121 )
*सवाल:-* जो शख्स अम्बिया–ए–किराम علیہ السلام के बारे में ये कहे के "मर कर मिट्टी में मिल गए" तो उसके लिए क्या हुक्म है ?
*जवाब:-* ऐसा कहने वाला गुमराह बद·मजहब *खब्बीस* है। ( मुसलमान नहीं )
*हवाला* ( बहरे शरीअत )
( अनवारे शरीयत पेज: 10 )
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*सवाल:-* कयामत की कुछ निशानियां बयान कीजिए?
*जवाब:-* यहां कयामत की कुछ निशानियां ही बयान की गई हैं गौर से पढ़ें और जायज़ा लें के क्या ये निशानियां अभी ज़ाहिर ना हुई हैं। अल्लाह ﷻ के रसूल *(ﷺ)* ने फरमाया
1:- जब दुनिया में गुनाह ज़्यादा होने लगें,
2:- हराम काम लोग खुल्लम खुल्ला करने लगें,
3:- मां बाप को तकलीफ़ दें और गैरों से मेल जोल रखें,
4:- अमानत में ख़यानत करें,
5:- जकात लोगों पर गिरां गुजरें,
6:- दुनिया हासिल करने के लिए इल्मे दिन पढ़ा जाए,
7:- नाच गाने का रिवाज ज़ियादा हो जाए,
8:- बदकार लोग कौम के पेशवा और लीडर हो जाएं,
9:- चरवाहे वगैरा कम दर्जे के लोग बड़ी बड़ी बिल्डिंगों में रहने लगें तो समझ लो के कयामत करीब आगई है।
*हवाला* ( मिशकात शरीफ बहारे शरीयत )
*नोट:-* अपने मालिक से तौबा कार्लो और झुकादो अपने सरों को अल्लाह ﷻ के आगे और सब की खैर व आफिय्यत की दुआ करो
अल्लाह ﷻ हमे क़ुरान व सुन्नत पर अमल करने की तोफ़ीक आता फरमाएं *आमीन*
*सवाल:-* जो शख्स कयामत का इंकार करे उसके लिए क्या हुक्म हैं?
*जवाब:-* कयामत का आना सच है अल्लाह ﷻ और उसके रसूल *(ﷺ)* का फरमान है इसको झूठ मानने वाला काफिर है। ( मुसलमान नहीं। )
*हवाला* ( बहरे शरीअत )
( अनवारे शरीयत पेज: 10-11 )
*सवाल:-* कयामत की कुछ निशानियां बयान कीजिए?
*जवाब:-* यहां कयामत की कुछ निशानियां ही बयान की गई हैं गौर से पढ़ें और जायज़ा लें के क्या ये निशानियां अभी ज़ाहिर ना हुई हैं। अल्लाह ﷻ के रसूल *(ﷺ)* ने फरमाया
1:- जब दुनिया में गुनाह ज़्यादा होने लगें,
2:- हराम काम लोग खुल्लम खुल्ला करने लगें,
3:- मां बाप को तकलीफ़ दें और गैरों से मेल जोल रखें,
4:- अमानत में ख़यानत करें,
5:- जकात लोगों पर गिरां गुजरें,
6:- दुनिया हासिल करने के लिए इल्मे दिन पढ़ा जाए,
7:- नाच गाने का रिवाज ज़ियादा हो जाए,
8:- बदकार लोग कौम के पेशवा और लीडर हो जाएं,
9:- चरवाहे वगैरा कम दर्जे के लोग बड़ी बड़ी बिल्डिंगों में रहने लगें तो समझ लो के कयामत करीब आगई है।
*हवाला* ( मिशकात शरीफ बहारे शरीयत )
*नोट:-* अपने मालिक से तौबा कार्लो और झुकादो अपने सरों को अल्लाह ﷻ के आगे और सब की खैर व आफिय्यत की दुआ करो
अल्लाह ﷻ हमे क़ुरान व सुन्नत पर अमल करने की तोफ़ीक आता फरमाएं *आमीन*
*सवाल:-* जो शख्स कयामत का इंकार करे उसके लिए क्या हुक्म हैं?
*जवाब:-* कयामत का आना सच है अल्लाह ﷻ और उसके रसूल *(ﷺ)* का फरमान है इसको झूठ मानने वाला काफिर है। ( मुसलमान नहीं। )
*हवाला* ( बहरे शरीअत )
( अनवारे शरीयत पेज: 10-11 )
क्रमस..........................

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