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इस्लाम से जुड़े कुछ सवाल जवाब भाग-3

*सवाल:-* किसी से शिर्क या कुफ्र हो जाए तो क्या करे?
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-----------------------------------------------------------*जवाब:-* तौबा और तजदीदे ईमान करे, बीवी वाला हो तो तजदीदे निकाह करे और मुरीद हो तो तजदीदे बैत भी करे।

*सवाल:-* शिर्क व कुफ्र के इलावा दूसरा गुनाह होजाए तो मुआफी की क्या सूरत है?
*जवाब:-* तौबा करे,अल्लाह पाक ﷻ की बारगाह में रोए गिड़गिड़ाए अपनी गलती पर नादम व पैशमान हो और दिल में पक्का अहद ( प्रतिज्ञा ) करे के अब कभी ऐसी गलती ना करूंगा सिर्फ ज़बान से तौबा—तौबा कह लेना तौबा नहीं है।
*दुआ* अल्लाह पाक ﷻ हमे और हमारे मां बाप को अज़ाबे कब्र और अज़ाबे हष्र से महफूज़ फरमाए और हमे और हमारे मां बाप को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम आता फरमाए आमीन या रब्बुल आलामीन ( ( *(ﷺ)* ))
*अनवारे शरीयत* उन्वान *शिर्क व कुफ्र का बयान* पेज:12-13
======== *बिदअत का बयान.* ========
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*सवाल:-* बिदअत किसे कहते हैं? और ये कितने तरीके की होती है?
*जवाब:-* क़ानून के शब्दों ( शरिअत ) में बिदअत ऐसी चीज़ के आविष्कार को कहते हैं जो हुज़ूर (ﷺ) के ज़ाहिर ( मौजूदा ) ज़माने में ना हुई। चाहे वह दीनी ( धार्मिक ) हो या दुनियावी।
बिदअत की तीन किस्में हैं
1:- बिदअते हसाना
2:- बिदअते स्य्या
3:- बिदअते मुबाहा।
*बिदअते हसाना* वह बिदअत है जो कुरान और हदीस के उसूल व नियम के मुताबिक हो और उसे उन्हीं पर अंदाजा लगाया गया हो। इसकी दो किस्में हैं। पहली बिदअते वाजिबा ( वाजिब= ज़रूरी ) जैसे क़ुरान व हदीस समझने के लिए इलमे नहू का सीखना ( ज्ञान का वाक्य-विन्यास सीखना = sentence सीखना ) और गुमराह ( भटके हुए ) फिरके जैसे खार्जी, राफ्ज़ी, कादयानी और वहाबी वगैरा पर रद के लिए दलाइल कायम करना। दूसरी बीदअते मुस्तहबा है ( मुस्तहब = अच्छा काम )
जैसे मदरसों को बनाना और नेक काम जिस का रिवाज़ उस ज़माने में ना था जैसे अज़ान के बाद सलात पुकारना। दुर्रे मुख्तार बाबुल अज़ान में है के अज़ान के बाद सलात पुकारना माहे रबीउल आखिर 781 हिजरी में जारी हुआ और ये बिदअते हसाना है।
*अनवारे शरीयत* उन्वान *बिदअत का बयान* पे

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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