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कुर-आनी आयातका गुण तथा फाइदाहरु (पहिलो खण्ड)


 السلام عليكم ورحمة الله وبركاته


आदरणीय दाजु-भाइ लगायत दिदि-बहिनिहरु आज हामि तपाइँ समक्ष कुर -आनका केहि आयातहरुको गुण अनि फाइदाहरु बारे लेख्दै छौ आशा गर्दछौ यसलाई केवल लेख मात्र नसम्झी यो कुराहरुलाई तपाइले आफ्नो दैनिकीमा पनि उतार्नु हुने छ भनि 


##### आयतुलकुर्सिका गुण र फाइदाहरु ######

१-आयतुलकुर्सि कुर-आन मजिद भित्रका सबै आयातहरुको सरदार हो #(मुस्तदरिक खण्ड-२ पाना-२६०)


२-जसले सुत्नेबेलामा आयतुलकुर्सि पढने गर्दछ अल्लाह पाक उसको घर लगायत वरी-परि रहेका उसका छर-छिमेकीहरुलाइ शान्तिमा राख्दछ ](मिर्कातुल मफातिः २-६८३)


३-आयतुलकुर्सि जुन घरमा पढिन्छ उक्त घरमा शैतान लगायत अरु बद-निगाही जस्ता चिजहरु उनिहरुको नजिक आउने छैनन #(तिर्मिधि २-१११ ) 


४-जसले हरेक फर्ज़ नमाज पश्चात आयतुलकुर्सि पढछ अर्को फर्ज़ नमाज सम्म उक्त वेक्ती अल्लाह पाकको सुरक्षामा रहन्छ #(कन्जुल उम्माल १-१४१)


५-जसले हरेक नमाज पछि आयतुलकुर्सि पढछ मृत्यु पश्चात उ जन्नत( स्वर्ग) मा प्रवेश गर्दछ #(ऎजन)


६-जुन खाना अनि सब्जिमा आयतुलकुर्सि पढिन्छ अल्लाह पाक उक्त खानामा कृपा गर्नु हुने छ #(दुर्रे मन्सुर १-३२३)


७-जुन सम्पति अनि सन्तानमा आयतुलकुर्सि दम(आयतुलकुर्सि पढेर फुक्ने) या लेखेर वा ताबिज बनाइ झुन्ड्याई दिनु हुने छ उक्त सम्पति या सन्तानमा शैतान उनीहरुको नजिक पनि आउने छैन #(हिस्ने हिसान १७९ सप्रमाण तिर्मिधि ,नसइ ,इब्ने माजा ,इब्ने हब्बान ,मुस्तदरिक हाकिम ) 


 ★ اَللّٰهُ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ-اَلْحَیُّ الْقَیُّوْمُ ﳛ لَا تَاْخُذُهٗ سِنَةٌ وَّ لَا نَوْمٌؕ-لَهٗ مَا فِی السَّمٰوٰتِ وَ مَا فِی الْاَرْضِؕ-مَنْ ذَا الَّذِیْ یَشْفَعُ عِنْدَهٗۤ اِلَّا بِاِذْنِهٖؕ-یَعْلَمُ مَا بَیْنَ اَیْدِیْهِمْ وَ مَا خَلْفَهُمْۚ-وَ لَا یُحِیْطُوْنَ بِشَیْءٍ مِّنْ عِلْمِهٖۤ اِلَّا بِمَا شَآءَۚ-وَسِعَ كُرْسِیُّهُ السَّمٰوٰتِ وَ الْاَرْضَۚ-وَ لَا یَـُٔوْدُهٗ حِفْظُهُمَاۚ-وَ هُوَ الْعَلِیُّ الْعَظِیْمُ(۲۵۵)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ अल्लाह है जिसके सिवा कोई मअबूद नहीं (फ़523) वह आप ज़िन्दा और औरों का क़ाईम रखने वाला (फ़524) उसे न ऊँघ आये न नींद (फ़525) उसी का है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में (फ़526) वह कौन है जो उसके यहाँ सिफ़ारिश करे बे उसके हुक्म के (फ़527) जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे (फ़528) और वह नहीं पाते उसके इल्म में से मगर जितना वह चाहे (फ़529) उसकी कुर्सी में समाए हुए हैं आसमान और ज़मीन (फ़530) और उसे भारी नहीं उनकी निगहबानी और वही है बुलन्द बड़ाई वाला। (फ़531)



##### आमनर्र्सुलका गुण र फाइदाहरु #######

 

सुरह बकरहका अन्तिमका दुइ आयात


 👇👇पहिलो आयात 

 ★ اٰمَنَ الرَّسُوْلُ بِمَاۤ اُنْزِلَ اِلَیْهِ مِنْ رَّبِّهٖ وَ الْمُؤْمِنُوْنَؕ-كُلٌّ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَ مَلٰٓىٕكَتِهٖ وَ كُتُبِهٖ وَ رُسُلِهٖ۫-لَا نُفَرِّقُ بَیْنَ اَحَدٍ مِّنْ رُّسُلِهٖ۫-وَ قَالُوْا سَمِعْنَا وَ اَطَعْنَا ﱪ غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَ اِلَیْكَ الْمَصِیْرُ(۲۸۵)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ रसूल ईमान लाया उस पर जो उसके रब के पास से उस पर उतरा और ईमान वाले सब ने माना (फ़620) अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों को (फ़621) यह कहते हुए कि हम उसके किसी रसूल पर ईमान लाने में फ़र्क़ नहीं करते (फ़622) और अर्ज़ की कि हमने सुना और माना (फ़623) तेरी माफ़ी हो ऐ रब हमारे, और तेरी ही तरफ़ फिरना है।


दोस्रो आयात 👇👇

 ★ لَا یُكَلِّفُ اللّٰهُ نَفْسًا اِلَّا وُسْعَهَاؕ-لَهَا مَا كَسَبَتْ وَ عَلَیْهَا مَا اكْتَسَبَتْؕ-رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَاۤ اِنْ نَّسِیْنَاۤ اَوْ اَخْطَاْنَاۚ-رَبَّنَا وَ لَا تَحْمِلْ عَلَیْنَاۤ اِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهٗ عَلَى الَّذِیْنَ مِنْ قَبْلِنَاۚ-رَبَّنَا وَ لَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهٖۚ-وَ اعْفُ عَنَّاٙ-وَ اغْفِرْ لَنَاٙ-وَ ارْحَمْنَاٙ-اَنْتَ مَوْلٰىنَا فَانْصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكٰفِرِیْنَ۠(۲۸۶)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ अल्लाह किसी जान पर बोझ नहीं डालता मगर उसकी ताक़त भर, उसका फ़ाइदा है जो अच्छा कमाया और उसका नुक़्सान है जो बुराई कमाई। (फ़624) ऐ रब हमारे हमें न पकड़ अगर हम भूलें (फ़625) या चूकें, ऐ रब हमारे और हम पर भारी बोझ न रख जैसा तूने हम से अगलों पर रखा था, ऐ रब हमारे और हम पर वह बोझ न डाल जिसकी हमें सहार न हो और हमें माफ़ फ़रमा दे और बख़्श दे और हम पर मेहर कर, तू हमारा मौला है तू काफ़िरों पर हमें मदद दे।


१-अब्दुल्लाह बिन मसऊद رضي الله عنه बाट वर्णन गरियको छ वहा भन्नु हुन्छ "जुन वेक्तिले रातमा सुरह बकरहको अन्तिमका दुइ आयात पढछ उसले धेरै पढ्यो र निक्कै उत्तम कार्य गर्यो " (दुर्रे मन्सुर १-३७८) 


२-वहा बाटै वर्णन गरियको छ " हजुर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लमले भन्नु भयो जसले राति सुरह बकरहको अन्तिमका दुइ आयात पढछ उसका निम्ति यो पर्याप्त हुने छ " (मिस्कात १८५ सप्रमाण बुखरी ,मुस्लिम ,अबु दाउद ,मुस्नद हमिदी) 


३-हजुर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लमको मधुर कथन रहेको छ "सुरह बकरहको अन्तिमका दुइ आयात मलाइ जेरे अर्शको खजानाबाट प्राप्त भयको हो र मलाइ भन्दा पहिले कुनै नबिहरु अलेही सलाम लाइ प्राप्त थियन "(कन्जुल उम्माल १-१४२) 


४-एउटा अर्को रिवायतमा उल्लेख गरे अनुसार हजुर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लमको मधुर कथन रहेको छ "अवस्य अल्लाह पाकले सुरह बकरलाइ दुइटा यस्तो आयातबाट समाप्त गर्नुभयको छ जुन मलाई अर्षको खजानाबाट प्राप्त भयको छ तिमीहरु उक्त आयातलाइ प्राप्त गर्नु र आफ्ना सन्तान अनि आइमाईलाइ सिकाउ किनकि यो सलात र कुर-आन अनि दुवा हो"(हिस्ने  हिसिन २१४)


#######सुरह कहफका गुण र फाइदाहरु######

सुराह कहफ जो कु-आन मजिदको पन्द्र र सोह्र पारामामा रहेको छ  यसको पनि हदीस शरिफबाट निकै धेरै गुण र फाइदा रहेको हामीले देखन सक्छौ अझ बिशेष जुम्माको दिन यसलाई विर्द(जप्नु) निक्कै फाइदा जनक रहने देखिन्छ 


१-हजरत अबु दरदा رضي الله عنه बाट वर्णन गरियको छ "हजुर पुर् नुर वहा माथि शान्ति होसबाट मुखारबिन्दु छ जसले सुरह फलकका शुरुवातका दस आयात हिफ्ज़ (कण्ठस्थ ) गर्छ उ दज्जालको फितनाबाट सुरक्षित रहने छ " (मुस्लिम १-२७१,मिस्कात १८५ )


२-वहाबाटै रिवायत गरियको छ "जसले सुरह फलकका शुरुवातका दस आयात हिफ्ज़ (कण्ठस्थ ) गर्छ उ दज्जालको फितनाबाट सुरक्षित रहने छ" (तिर्मिधि २-११२ मिश्कात १८७)


३-हजरत इब्ने अब्बास رضي الله عنه बाट वर्णन गरियको छ "नबि ए करीम वहा माथि शान्ति होसले भन्नु भयो सुरह कहफ़को नाम 'हाइला' हो उक्त सुरहले आफ्नो तिलावत (पढाई) गर्नेको जहन्नम (नर्ग)बाट सुरक्षा गर्ने छ 


४-हजरत अबु सइद खुदरी رضي الله عنه बाट वर्णन गरियको छ "जसले जुम्माको दिन सुरह कहफ़ पढछ जहाबाट उसले पढेको छ त्यहाबाट खाना-ए-काबा सम्मको दुरीलाई नुरबाट प्रकाशमय गरिदिनेछ "(कन्जुल उम्माल १-१४३) 


५-अर्को एउटा रिवातयत अनुसार जुम्माको दिन सुरह कहफ़ पढ्नु अर्को जुम्मासम्मका निम्ति गुनाह (पाप) को कफ्फारा (प्रायश्चित) हुने छ (दुर्रे मन्सुर ४-२०६)


६-हजुर पुर् नुर वहा माथि शान्ति होसबाट मुखारबिन्दु छ  जुन घरमा सुरह कहफ़ पढिन्छ उक्त घरमा राति शैतान प्रवेश गर्ने छैन " (कन्जुल उम्माल १-१४३) 

सुरह कहफ़का शुरुवाती दस आयातहरु👇👇👇👇 

 पहिलो आयात ★ اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِیْۤ اَنْزَلَ عَلٰى عَبْدِهِ الْكِتٰبَ وَ لَمْ یَجْعَلْ لَّهٗ عِوَجًاؕٚ(۱) 

☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ सब ख़ूबियाँ अल्लाह को जिसने अपने बन्दे (फ़2) पर किताब उतारी (फ़3) और उसमें असलन् कजी न रखी। (फ़4)

( AL-KAHF - 18:1 )

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 दोस्रो आयात ★ قَیِّمًا لِّیُنْذِرَ بَاْسًا شَدِیْدًا مِّنْ لَّدُنْهُ وَ یُبَشِّرَ الْمُؤْمِنِیْنَ الَّذِیْنَ یَعْمَلُوْنَ الصّٰلِحٰتِ اَنَّ لَهُمْ اَجْرًا حَسَنًاۙ(۲)

☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ अदल वाली किताब कि (फ़5) अल्लाह के सख़्त अज़ाब से डराए और ईमान वालों को जो नेक काम करें बशारत दे कि उनके लिये अच्छा सवाब है।

( AL-KAHF - 18:2 )

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तेस्रो आयात ★ مَّاكِثِیْنَ فِیْهِ اَبَدًاۙ(۳)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ जिसमें हमेशा रहेंगे।

( AL-KAHF - 18:3 )

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 चौथौ आयात ★ وَّ یُنْذِرَ الَّذِیْنَ قَالُوا اتَّخَذَ اللّٰهُ وَلَدًاۗ(۴)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ और उन (फ़6) को डराए जो कहते हैं कि अल्लाह ने अपना कोई बच्चा बनाया।

( AL-KAHF - 18:4 )

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 पाचौ आयात ★ مَا لَهُمْ بِهٖ مِنْ عِلْمٍ وَّ لَا لِاٰبَآىٕهِمْؕ-كَبُرَتْ كَلِمَةً تَخْرُ جُ مِنْ اَفْوَاهِهِمْؕ-اِنْ یَّقُوْلُوْنَ اِلَّا كَذِبًا(۵)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ इस बारे में न वह कुछ इल्म रखते हैं न उनके बाप दादा (फ़7) कितना बड़ा बोल है कि उनके मुंह से निकलता है निरा झूठ कह रहे हैं।

( AL-KAHF - 18:5 )

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 छैठौ आयात ★ فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلٰۤى اٰثَارِهِمْ اِنْ لَّمْ یُؤْمِنُوْا بِهٰذَا الْحَدِیْثِ اَسَفًا(۶)


☆ Kanzul Iman अनुवाद ◆ तो कहीं तुम अपनी जान पर खेल जाओगे उनके पीछे अगर वह इस बात पर (फ़8) ईमान न लायें ग़म से। (फ़9)

( AL-KAHF - 18:6 )

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 सातौ आयात ★ اِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْاَرْضِ زِیْنَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ اَیُّهُمْ اَحْسَنُ عَمَلًا(۷)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ बेशक हमने ज़मीन का सिंगार किया जो कुछ उस पर है (फ़10) कि उन्हें आज़मायें उनमें किस के काम बेहतर हैं। (फ़11)

( AL-KAHF - 18:7 )

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आठौ आयात  ★ وَ اِنَّا لَجٰعِلُوْنَ مَا عَلَیْهَا صَعِیْدًا جُرُزًاؕ(۸)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ और बेशक जो कुछ उस पर है एक दिन हम उसे पट पर मैदान कर छोड़ेगे। (फ़12)

( AL-KAHF - 18:8 )

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 नवौ आयात ★ اَمْ حَسِبْتَ اَنَّ اَصْحٰبَ الْكَهْفِ وَ الرَّقِیْمِۙ-كَانُوْا مِنْ اٰیٰتِنَا عَجَبًا(۹)


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ क्या तुम्हें मालूम हुआ कि पहाड़ की खोह और जंगल के किनारे वाले (फ़13) हमारी एक अजीब निशानी थे।

( AL-KAHF - 18:9 )

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 दसौ आयात ★ اِذْ اَوَى الْفِتْیَةُ اِلَى الْكَهْفِ فَقَالُوْا رَبَّنَاۤ اٰتِنَا مِنْ لَّدُنْكَ رَحْمَةً وَّ هَیِّئْ لَنَا مِنْ اَمْرِنَا رَشَدًا(۱۰) 


☆ Kanzul Iman अनुवाद 

◆ जब उन जवानों ने (फ़14) ग़ार में पनाह ली फिर बोले ऐ हमारे रब हमें अपने पास से रहमत दे (फ़15) और हमारे काम में हमारे लिये राहयाबी के सामान कर।

( AL-KAHF - 18:10 )

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About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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