■ शैतान और एक आबिद ■
लिहाज़ा तीनों भाईयों ने इस अम्र पर इत्तिफ़ाक कर लिया कि बहन को आबिद के सुपुर्द कर जायें वह आबिद उनकी नज़र में तमाम बनी इस्राईल में परहेज़ गार था, चुनाँचे वह बहन को लेकर उस आबिद के पास आये और दरख्वास्त की कि जब तक हम लड़ाई से वापस न आयें हमारी बहन आप के साया - ए - आतिफत रहे आबिद ने इंकार किया उनसे और उनकी बहन से खुदा की पनाह मांगी लेकिन तीनों भाईयों ने इस्रार किया और राहिब इस शर्त पर मान गया कि अपनी बहन को मेरे इबादत खाने के सामने किसी घर में छोड़ जाओ, चुनाँचि तीनों भाईयों ने ऐसा ही किया और अपनी बहन को आबिद के सामने एक घर में ला उतारा और खुद चले गए, वह लड़की आबिद के करीब एक मुद्दत तक रहती रही, आबिद उस के लिए खाना लेकर चलता था और अपने इबादत खाने के दरवाजे पर रख कर किवाड़ बंद कर लेता था, और अन्दर वापस चला जाता था और लड़की को आवाज़ देता था वह अपने घर से आकर खाना उठा कर ले जाती थी, कुछ दिनों के बाद शैतान ने आबिद के दिल में यह ख्याल पैदा किया कि लड़की दिन को अपना खाना लेने कि लिए घर से निकलती है, कहीं ऐसा न हो कि कोई उसे देख कर उस पर दस्त अन्दाजी करे और उसकी अस्मत ख़राब करले बेहतर यहै कि मैं खुद उस का खाना उसके दरवाजे पर रख आया करूँगा, उस में मुझे अज़्र भी बहुत मिलेगा, अल - गर्ज वह आबिद खुद खाना लेकर उसके घर जाने लगा कुछ दिनों के बाद शैतान फिर. उसके पास आया और उसे इस बात पर उभारा तुम उस लड़की से बात चीत किया करो, तो लड़की की वहशत दूर होगी, और यह बड़ा नेक काम होगा, चुनाँचि वह आबिद उस लड़की से कलाम भी करने लगा, और अपने इबादत खाने में उतर कर उस के घर जाने लगा और दिन भर बातें करने लगा, दिन को लड़की के पास रहता और रात को अपने इबादत खाने में आ जाता कुछ अर्सा के बाद शैतान ने आबिद पर लडकी की खुबसूरती का जाल फेंका और एक रोज़ आबिद ने लडकी के जानों और रूख़्सार पर हाथ मारा, उसके बद शैतान बराबर उसे उक्साता रहा, हत्ता कि उसे उससे मुलव्विस् कर दिया, लड़की ने एक लड़का जना,
■••• फिर शैतान आबिद के पास आया और कहने लगा, अगर लड़की के भाई आ गए तो तुम क्या करोगे ? मैं डरता हूँ कि तुम बड़े ज़लील होगे, तुम ऐसा करो कि इस बच्चे को ज़मीन में गाड़ दो, आबिद ने ऐसा ही किया, फिर शैतान ने आबिद से कहा कि मुझे शुबह है कि यह लड़की अपने भाईयों से सारा किस्सा बयान कर देगी, लिहाजा उसे भी ज़िबह कर के बच्चे के साथ दफ़न कर दो, अल - गर्ज़ आबिद ने बच्चे के साथ लड़की को भी ज़िबह कर के दफ़न कर दिया, और खुद इबादत ख़ाने में जाकर इबादत करने लगा, एक मुद्दत के बअद लड़की के भाई वापस आए और आबिद से अपनी बहन का हाल पूछा तो आबिद ने कहा वह मर गई है और कब्रिस्ता में उन्हें ले जाकर एक कब्र दिखा दी, और कहा यह तुम्हारी बहन की कब्र है, उस पर फ़ातिहा पढ़ो भाईयों ने दुआ - ए - खैर की और वापस घर चले आए रात को तीनों भाईयों ने ख्वाब में देखा कि
■••• शैतान एक मुसाफिर आदमी की शक्ल में आया है, और उनसे उन की बहन को पूछा, उन्होंने उसके मरने की ख़बर दी तो शैतान ने तीनों से कहा नहीं, ऐसा नहीं, बल्कि उस आबिद ने तुम्हारी बहन की इज्जत को लूटा है और उससे बच्चा पैदा हुआ, जिसे आबिद ने मार डाला और तुम्हारी बहन को ज़िबह भी कर डाला और दोनों को दफ़न कर दिया है, तुम उस घर में दाखिल होकर फुलाँ कोने को जाकर देखो, वहाँ वह गढ़ा मौजूद पाओगे, सुबह तीनों भाई उठे, और एक दूसरे से ख्वाब बयान कर के उठे और उस मकान में गए और उस कोने की तरफ बढ़े, तो वहाँ गड़ा मौजूद पाया, खोदा तो दोनों लाशें निकल आई, उसके. बाद वह आबिद के पास आए, तो उसने भी इक्बाल - ए - जुर्म कर लिया, फिर तीनों भाईयों ने बादशाह से जाकर नालिश की तो आबिद को इबादत खाने से निकाला गया और उसे फाँसी पर लटकाने का हुक्म दिया गया, जब उसे फाँसी के लिए दार पर लाया गया तो शैतान आ गया और कहने लगा मुझे पहचानों, मैं तुम्हारा वही साथी जिसने तुझे औरत के फ़ितने में डाल दिया अब अगर मेरा कहा मानों तो मैं तुम्हें फाँसी से बचा सकता हूँ, उसने कहा ! कहो क्या कहते हो ? मैं मानूँगा शैतान ने कहा खुदा का इन्कार कर दो, चुनाँचि आबिद बद बख्त ने खुदा का इन्कार कर दिया, और काफिर हो गया ! शैतान उसे वहीं छोड़ कर चला गया, और सिपाहियों ने उसे दार पर खींच दिया !
📘 (तलबीसे इब्लीस स : 37)
■••• सबकः शैतान के पास मर्दो को पकड़ने का सब से बड़ा जाल औरत है, वह मलऊन औरतों के जरिए बड़ों बड़ों को बहका लेता है हमारे हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसी लिए औरत को परदे में रखा है, और मरद - व - औरत दोनों को निगाहें नीची रखने का हुक्म सुनाया है और गैर महरम औरत के पास तन्हाई में बैठाने या उस से कलाम करने या उसे छूने से रोका है, पस मुसलमानों को शैतान के इस जाल से भी होशियार रहना चाहिए, आज कल शैतान नई तहज़ीब के हाथों इस जाल को बाज़ारों क्लबों थेटरों और मेलों ठेलों में फिंकवा रहा है, और कई तरक्की पसंदों को फाँस रहा है, शैतान बड़ा चालबाज़ और अय्यार है, कहीं तो औरतों की मदद व हिमयात के रंग में मर्दो को उनकी तरफ माइल करता है और कहीं यह ख्याल पैदा करके कि हुस्न व खूबसूरती खुदा की सनअत है और सनअते खुदा को देखना भी कारे खैर है, मर्दो की नज़रें औरतों पर जमा देता है और फिर यह मलऊन दीन व ईमान बरबाद करके साथ भी छोड़ देता है और यूँ कह देता है कि मैं तुम से बरी हूँ और मैं खुदा से डरता हूँ !
📘 (शैतान की हिकायात, सफ्हा: 78-82)

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