ख़ूनरेज़ मंगोल (तातारियों)
ख़ूनरेज़ मंगोल (तातारियों) क़ुबूल-ए-इस्लाम
सारी दुनिया मे खून की नदियां बहाने वाली बहशी दरन्दी जुनूनी तातारी फ़ौज जिधर निकलती लाशों के पहाड़ और खून की नदियां बहा देती थी उनकी तारीख (इतिहास) इतना ख़ूनरेज़ है कि लिखने वालों की कलम भी कांप उठी ऐसी दरिंदगी की दास्तान को कलम बन्द करने में
ये वही तातारी हैं जिहोने जब बगदाद का रुख किया तो 18000 उलमा और 25000 से 50000 आम शहरी को मौत के घाट उतार दिया था और बहुत बड़ा ज़खीरा दीनी किताबों का जिनकी तदाद लाखों में थी उनको दरिया ए दजला की कोख में उतार दिया (फेंक दिया) उस वक़्त बगदाद सारी दुनिया में इल्म का मरकज़ था!!
पूरी दास्तान ब्यान कर पाना तो मुमकिन नही जैसा की मैने आप दोस्तों से वादा किया था कि मुख्तसर
वाक्या आपके सामने पेश करूँगा क्योकि तवील पोस्ट भी पढ़ना मुश्किल हो जाती है
सुकूत-ए-बगदाद हो चुका था इस्लामी रियासतों के सीनों से लहू बह रहा था और अब्बासी ख़िलाफ़त की बिसात लपेटी जा चुकी थी और तातारी फ़ौज जिधर का रुख करती वहां के मुकीम वो रियासत व शहर छोड़ कर पहले ही चले जाते ख़ौफ़ की वज़ह से और जब उलमा ए किराम के अंदर सकत न रही मुक़बले कि तातारियों से और अक्सर उलमा शहीद कर दिए गए दीन का निज़ाम तीतर बितर होकर रह गया तो फिर अब जिम्मेदारी थी उन लोगो की जिनके पास दीन के बातिन की हिफ़ाज़ है
उस वक्त के वली ए कामिल "वक़्त के क़ुतुब"
दरवेश फ़कीर ने सर सजदे में रखा और अल्लाह तआला से इल्तेज़ा की फ़ितना-ए-तातार ने इस्लाम को जो नुकसान पहुंचाया है तू मुझे इज़ाज़त दे हिम्मत दे में उसकी तलाफ़ी करूँ फिर उस बुजुर्ग की दुआ के साथ फ़कीर दरवेश उठे फिर वो हलाकू खां जैसे जालिम भी "औलिया इक़राम" के तसरूफात और उनकी दुआओं का मुक़बला न कर सके
वो दरवेश फ़कीर शेख़ शैफ अद'दीन अल बुखारी अल खुरासानी (शेख अहमद) फिरदौसी रहमतुल्लाही तआला अलैह थे
यहाँ आपको एक चीज़ और जहन नसीन करता चलूँ फिरदौसी एक सिलसिला ए तरीक़त है इसी सिलसिले के अज़ीम पेशवा अज़ीम रूहानी बुजुर्ग हिन्द में तशरीफ़ लाये थे कश्मीर में सय्यद मीर अली हमदानी रहमतुल्लाही तआला अलैह जिनके दस्ते बैत पर 2 लाख लोगों के दिलों में तौहिद के चिराग रौशन हुए और रूह रिसालत के इश्क़ से मुअत्तर हुई थी अब वापस मोजू पर आते हैं
पूरा शहर तातारियों के ख़ौफ़ से जा चुका था बस दरवेश और उनके शागिर्द मुरीदीन बाकी थे शहर में
जब मंगोल चंगेज़ खान ग्रैंड सन (बर्खे खान) वहां पहुंचा तो उसको खबर हुई के सारा शहर जा चुका है खाली कर बस कोई दरवेश फ़कीर मौजूद हैं जो अभी भी क़याम पज़ीर हैं उन्हें बंदी बना कर लाया बर्खे खान के सामने
बर्खे खान ने कहा तुम्हे पता नही में कौन हूँ
दरवेश ने कहा हां जनता हु तुम मंगोल शहज़ादे हो
फिर ये शहर छोड़ कर क्यों नही गए
दरवेश ने कहाँ अगर जगह मेरी होती तो छोड़ जाता
मगर ये जगह बल्कि पूरी क़ायनात अल्लाह ही कि है इसे छोड़ कर कहा जाऊं जो जगह अल्लाह की न हो ये अल्फाज़ बर्खे खान की रूह में उतर गए और ज़हन में अज़ीब सी कैफियत पैदा हो गयी
फिर बर्खे खान ने दरवेश से कहा अब तुम्हे कौन बचाएगा
दरवेश ने कहा- अल्लाह
अल्लाह लफ्ज़ से बर्खे खान के दिल की दुनियां बदल गयी उसके दिल मे कुछ न कुछ तो चल रहा था उसने दरवेश को छोड़ दिया और शहर में मुक़ीम रहने की इज़ाज़त भी फ़राहम कर दी
फिर क्या मंगोल शहज़ादा बर्खे खान रातों को लिबास बदल कर शेख़ की महफ़िल में जाने लगा
उसको शेख से अकीदत हो गयी थी सूफी दरवेश (वली ए कामिल) की नज़र दिल पर थी वक़्त गुज़रा दिलों के हाल को अल्लाह ने उसके तब्दील कर दिया और दरवेश के दस्त मुबारक पर बैत कर दाखिल ए ईमान हो गया और शेख के हाथों को चूम कर रो पड़ा शेख ने फरमाया अभी अपने ईमान का ऐलान ए आम न करना बाकी शहज़ादे आपको कत्ल कर देंगे सही वक्त का इंतजार करो
कुछ वक्त बाद बर्खे खान की तख्त नसीनी होनी थी जब बर्खे खान की ताज पोशी हुई हुकूमत व फ़ौज की बाग दौर हाथ आयी अपने हिस्से की तो बर्खे खान ने अपने ईमान का ऐलान कर दिया और साथ ही आपके साथ वाली सारी फ़ौज और पूरी रियासत शेख़ के दस्त मुबारक पर दाखिल ए ईमान हो गयी इससे तातारियों के पूरे एम्पायर में अफरातफरी मच गई और अब तातारियों के 2 हिस्से हो गए 1 ईमान के दुश्मन जो पहले थे दूसरे ईमान के दोस्त जो बर्खे खान के साथ थे ये बात सारी दुनिया मे पहुँच चुकी थी और बर्खे खान ने मिस्र के सुल्तान रुकुनुद्दीन बिबर्स को ये इत्तेला दी वो अपने चचा'ज़ाद हलाकू खान के जुल्म के खिलाफ अमन इंसाफ व अदल क़ायम करने को जिहाद के लिए तैयार है और मिस्र से इत्तेहाद करना चाहता है सुल्तान-ए-मिस्र ने ये पेशकश ब'खुशी क़ुबूल करते हुए अय्यिमाये हरमैन ए शरीफ़ेन को बर्खे खान के लिए दुआओं का खत लिख भेजा
तभी तो अल्लामा इक़बाल रहमतुल्लाह अलैह बोले थे इसपर
-है अयान योरिश ए तातार के अफ़साने से
पासबाँ मिल गए काबे को सनम खाने से-
ये था सूफिया औलिया फकीरों दरवेश क़लन्दरों का इस्लाम मे किरदार!!!

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