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हज़रत अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो अन्ह


بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ

اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

राफ्जी (शिया) सहाबा के गुस्ताख हैं वैसे ही आज के सुलाहकुल्ली जो अपने आप को अहले सुन्नत (सुन्नी) कहते हैं [लेकिन इनका अहले सुन्नत से कोई ताल्लुक नहीं है] ये लोग भी राफ्जियत की जानिब बहुत तेजी के साथ अपना कदम बढ़ा चुके हैं और ये भी सहाबिये रसूल ﷺ हज़रत अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो अन्ह और हज़रत अबू सूफीयान रदीअल्लाहो तआला अन्हुमा की शान मे बहुत सी गुस्ताख़ी करने लगे है, यही वजह है कि आज हमें इनका बायकॉट करना पड़ रहा है.!

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपनी मुकद्दस किताब में हुजूर ﷺ के सच्चे साथी यानी सहाबा का ज़िक्र करते हुए यूँ फरमाता है :

مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِؕ-وَ الَّذِیْنَ مَعَهٗۤ اَشِدَّآءُ عَلَى الْكُفَّارِ رُحَمَآءُ بَیْنَهُمْ تَرٰىهُمْ رُكَّعًا سُجَّدًا یَّبْتَغُوْنَ فَضْلًا مِّنَ اللّٰهِ وَ رِضْوَانًا٘-سِیْمَاهُمْ فِیْ وُجُوْهِهِمْ مِّنْ اَثَرِ السُّجُوْدِؕ-ذٰلِكَ مَثَلُهُمْ فِی التَّوْرٰىةِ ﳝ- وَ مَثَلُهُمْ فِی الْاِنْجِیْلِ ﱠ

तर्ज़ुमा अल कुरान :- "मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं और उनके साथ वाले (सहाबा) काफिरो पर सख्त हैं और आपस मे नर्म दिल, तू उन्हें देखेगा रुकु करते सज्दा मे गिरते हुए, अल्लाह का फ़ज़्ल और रिज़ा चाहते हुए, उनकी अलामत उनके चेहरों मे है सज्दो के निशान से, ये उनकी सिफात तौरात मे है और उनकी सिफात इन्जील मे"

📓सूरह फ़तह आयत नं. 29

और अब वो लोग जो किसी सहाबीये रसूल ﷺ ख़ुसुसन जो हज़रत अमीरे मुआविया व हज़रत अबू सूफियान रदीअल्लाहो तआला अन्हुमा को हल्के लफ्ज़ो से याद करते है और उनकी शान मे ज़बानदराजी करते है वो अपनी खैर मनायें।

अल्लाह करीम अपने मुकद्दस कलाम कुराने मजीद वल फुर्काने हमीद में इरशाद फरमाता है:-

هُوَ سَمّٰىكُمُ الْمُسْلِمِیْنَ ﳔ مِنْ قَبْلُ وَ فِیْ هٰذَا لِیَكُوْنَ الرَّسُوْلُ شَهِیْدًا عَلَیْكُمْ وَ تَكُوْنُوْا شُهَدَآءَ عَلَى النَّاسِ

तर्जुमा अल कुरान :- उसने तुम को (सहाबा को) पसंद किया और तुम पर दीन मे कुछ तंगी न रखी कि तुम्हारे बाप इब्राहीम का दीन है, अल्लाह ने तुम्हारा नाम मुसलमान रखा है अगली किताबों में और इस कुरान मे भी, ताकि रसूल तुम पर गवाह हो और तुम लोगो की गवाही दो..

📓सूरह हज्ज आयत नं.78

ये आयते करीमा साफ साफ बता रही है कि अल्लाह पाक ने अपने रसूल ﷺ के साथ और सोहबत के लिए सहाबा को खुद चुना था, अब जिनका इन्तेख़ाब खुद हक तबारक व तआला ने फरमाया फिर उनकी अज़मत का अंदाजा कौन कर सकता है.?


अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का हम सुन्नी बरेलवियों और अहले सुन्नत के तमाम हक़ सिलसिलों पर बहुत बड़ा एहसान है कि हम मुहिब्बे अहले बैत और मुहिब्बे सहाबा है.!

अलहम्दुलिल्लाह अल्लाह ने हमें अपने उन चुनिंदा बंदो मे रखा है जिनके दिलों मे प्यारे आक़ा मुस्तफा जाने रहमत रसूलेआज़म ﷺ की और उनके जां निसारों की सच्ची पक्की मुहब्बत है, अल्लाह हम सब का खात्मा बिलखैर फरमाये।

आमीन या रब्बुल आलमीन

अब जो लोग सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह पर इतनी बेहुरमती से पेश आते हैं वो लोग बेशक अल्लाह के कलाम के खिलाफ बात करते हैं और हमें चाहिए कि हमें ऐसे लोगों से सलाम व कलाम दोनो चीजों से दूर रहना चाहिए।

हदीसे:- हज़रत जाबिर रदिअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है हुज़ूरﷺ ने फरमाया:-

आग (जहन्नम की) उस मुसलमान को न छुयेगी जिसने मुझे देखा या मेरे देखने वालो (सहाबा ए किराम) को देखा। 

📓जामा अल तिर्मीजी, जिल्द 2, अल सफा 225

यहाँ तो सिर्फ सहाबा की ही नहीं बल्कि ताबई बुर्ज़ुगों की शान इतनी बुलंद हो गई की उन्होंने सिर्फ सहाबा को देखा है तो उन पर जहन्नम की आग हराम हो गई, अब इससे हम और आप ये गुमान भी नहीं कर सकते हैं कि सहाबा ए किराम अजमईन का मर्तबा क्या होगा?

इसीलिए बरेली से मेरे इमाम अहमद रज़ा ने फरमा दिया :-

"जिस मुसलमां ने देखा उन्हें एक नज़र,

उस नज़र की बसारत पे लाखों सलाम.!

हदीस:- प्यारे मुस्तफा जाने रहमत ﷺ इरशाद फरमाते हैं कि मेरे सहाबा के बारे मे अल्लाह से डरो और मेरे बाद उन्हें निशाना न बनाओ, जिसने उनसे मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने उनसे बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा और जिसने उन्हें तकलीफ दी उसने मुझे तकलीफ दी और जिसने मुझे तकलीफ दी उसने अल्लाह को तकलीफ दी और जो अल्लाह को तकलीफ देगा करीब है कि अल्लाह पाक उसे अपनी गिरफ्त (अज़ाब) मे ले ले।

📓मिश्कात-उल-मसाबिह, सफ़ह 554

बरेली शरीफ से हर वक्त ये सदा आती है :-

अहले सुन्नत का है बेड़ा पार अस्हाबे हुज़ूर

नज़्म है और नाव है इतरत रसूलअल्लाह की ﷺ

हदीस:- हज़रत उमर फ़ारूके आज़म रदीअल्लाहो तआला अन्हु रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूलﷺ ने फरमाया :- मैं ने अपने रब से अपने बाद सहाबा के इख्तेलाफ़ के बारे मे पूछा तो मुझे वही(अल्लाह की तरफ से कलाम) हुई कि ऐ मुहम्मद ﷺ तुम्हारे सारे अस्हाब मेरे नज़दीक आसमान के तारों की तरह हैं, रोशनी में अगरचे कम ज़ियादा हों मगर नूर और हिदायत हर एक में है, पास जिनके सहाबा के दरमियान के इख्तेलाफ़ मे जिसके मसले को इख्तियार की वो मेरे नज़दीक हिदायत पर है।

📓मिश्कात-उल-मसाबिह, सफ़ह 554

यानी सहाबा के इख्तेलाफ़ का ताल्लुक़ हक से है, इसलिए उनमें से किसी की भी इक्तेदा हिदायत ही है और इस हदीस से साबित हुआ अल्लाह के नज़दीक तमाम के तमाम सहाबा मक़बूल और मेहबूब हैं।

हदीस:- हज़रत इब्ने उमर रदीअल्लाहो तआला अन्हु कहते हैं कि अल्लाह के रसूलﷺ ने फरमाया:- "जब तुम उन लोगों को देखो जो मेरे सहाबा के बारे मे बुरा भला कह रहे हैं तो(उनसे) कहो तुम पर अल्लाह की लानत हो।"

📓الجامع الترمذي،،، جلد-2، الصفحة- 225

तमाम दुश्मने सहाबा बिलखुसुस राफ्जी, गैर मुक़ल्लिदीन और अजमेर शरीफ के वो मुजावर जो सहाबा के गुस्ताख़ है उन सब पर अल्लाह की लानत हो।


सहाबा ए किराम मुज्तहिद थे उनमें जो इख्तेलाफ़ हुआ अगर उसमें किसी ने गलती भी की तब भी उन्हें एक नेकी ज़रूर मिली....

हुज़ूर ﷺ फरमाते हैं :-

और जब फैसला करने और इज्तेहाद करने में उनसे गलती हो तब भी वो सवाब पायेंगे

📓صحيح البخاري،،، جلد-2، الصفحة-92

हज़रत इब्ने अब्बास रदिअल्लाहुु अन्ह का एक कौल तमाम सहाबा के बारे मे पढ़े :-

ولا تسبوا اصحاب محمد صلى الله عليه وسلم فلمقام أحدهم ساعة يعنى مع النبى صلى الله عليه وسلم خير من عمل أحدكم اربعين سنة

तर्जुमा :- तुम मुहम्मदﷺ के साथ वालों को बुरा न कहो,उनका कुछ देर हुज़ूर के साथ रहना तुम्हारे 40 साल के अमल से बेहतर है।

📓شرح العقيدة الطحاوية، الصفحة-398

कहां सहाबा-ए-किराम का मक़ामे बुलंद और कहां ये ज़मीन की पस्तिया.?🤷🏻‍♂️

♦️रुखे मुस्तफा पर उनकी एक नज़र पड़ी तो सुरईया की बुलंदियों पर उन्हें पहुँचा दिया जो हमारे गुमान से भी वरा है।


About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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