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*सल्तनत ए 🗡️उस्मानिया* *पोस्ट नम्बर 6



         *ओरहान गाज़ी*  


*बरोसा में उस्मान गाज़ी के बेटे ओरहान गाज़ी तख्त-नसीन हो गए थे_1400 सदी में आना अनातोलिया में सूरते हाल कुछ ऐसी थी कि जितनी भी छोटी रियासत थी उनके पास दो ही रास्ते थे एक या तो वो छोटी छोटी रियासतों पे कब्जा करले दसरा ये की वो खुद बड़ी रियासत के कब्जे में आके खत्म हो जाए*

*यही मुश्किल ओरहान गाजी के भी सामने थी और वो दो जगह थी एक मशरिक में अपने हम मज़हब ,मुसलमान तुर्को की दो रियासते , (1)केराशी, (2) कर्मानिया , वजूद में आचुकी थी ओर इन रियासतों को खास तौर पर कर्मानिया को मुसलमानो की उस वक़्त की सबसे बड़ी हुकुमत ममलोक सल्तनत की हिमायत असील थी,*

*ममलोक सल्तनत आज के इस्राइल , फलस्तीन , सऊदी अरब और मिस्र तक फैली थीं, ओरहान गाज़ी के सामने एक चेलेंज ,मुस्लिम रियासते जो मशरिक , जुनुब में थी, दूसरी तरफ रोमियो की ब्रेजेंटाइन एम्पियार जो मगरिब में थी ,ओर बोहोत ताक़तवर रियासत थी पूरा यूरोप  ओर ईसाई इसके साथ खड़े होते थे*

*इन दोनो रियासतों से सुल्तान ओरहान हालत ए जंग में भी थे*

*उस्मानी रियासत दोनो तरफ से घिरी हुई थी उसके बावजूद उसने कैसे रूमियों को घेरा ,*

आनातोनिया से ब्रेजीनटाईन एम्पियर का इक़तीतार तो खत्म हो चुका था लेकिन अनातोलिया के सुमाली इलाके में अब भी छोटे छोटे सहर ओर किले उनके कब्जे में थे,

*ओर ओरहान गाज़ी इनसे वो कब्ज़े छुड़ाना चाहते थे*

*दौरे हुकुमत*              मार्च1362-
                            15 जून1389

*पूर्वज वालिद*       सुल्तान ओरहान गाज़ी

*वालिदा।*                 नीलोफर खातून

*उत्तराधिकारी।*          बायजीद बे

*पैदाइस*               29जून1326
                           शहर बरसा 
,                        वर्तमान तुर्की में

*विसाल।*              15 जून 1389
                         (62 वर्ष की उम्र) 

*दफन मकबरा*     में दफनाया    
                           अंगों सुल्तान मुराद के     
                            मकबरे , कोसोवो

*धर्म मजहब*         इस्लाम सुन्नी हनफ़ी


*⚔️सुल्तान ओरहान गाज़ी⚔️*

*एक एक करके उस्मानियो ने सारे किले फतेह कर के शहर से रोमियो को पूरी तरह खत्म कर दिया*

इस जंग के बाद रूमी लस्कर का सबसे बड़ा जनरल (john v kantakouzenos) केटागो जीनस उस्मानि फ़ौज़ की बहादुरी से बड़ा मुतासिर हुवा ,उसने इनसे लड़ने की बजाए , दोस्ती करने का फैसला किया, , वो इस लिए की वो रूमी शहनशाह बनना चाहता था , ओर इस बगावत के लिए बाहर से उस्मानी सेना जैसी बहादुर सेना की मदद की जरूरत थी, 

*जनरैल  (john v kantakouzenos)  ने खुफिया तरीके से ओरहान गाज़ी से बात की ओर उनको मदद की दरखुवास्त की ओर इस मदद के बदले में बोहोत से पुरकसिस फायदे देने का वादा भी किया , जिनमे से एक ये भी था कि अगर सुल्तान उसकी मदद करने का वादा करे ,तो वो अपनी बेटी की शादी सुल्तान से कर देगा*
*ओरहान गाजी तय्यार हो गए,, ओर ऐसे पूरी कहानी ही उलट हो गई उस्मानी सल्तनत के सबसे बड़े दुश्मन रूमी का सबसे बड़ा जनरैल उनके साथ मिल चुका था_ जो उस्मान गाजी रूमीओ से चारो तरफ से घिरे हुवे थे वो अब रूमियों को चारों तरफ से घेरे हुवे थे,,*

सुल्तान ओरहान ने ये पेशकस कुबूल की ओर इस गड़जोड का इम्तिहान सुरु हो गया

*हुवा यू की 1341 में जब रोमी शहनशाह की मौत हुई और उसकी जगह उसका 9 साला बेटा (john v palaiologos) तख्त पर बैठाया गया तो इसी जनरैल केटागो-जीनस (john v kantakouzenos) ने बगावत करदी, उसने मुतालबा किया कि उसे भी शरिक शहनशाह बनाया जाए, वरना वो अपनी रियासत से जंग करेगा _ इधर 9 साला शहनशाह को रो कुछ समझ नही थी लेकिन उसकी माँ जो उसकी सरपरस्ती कर रही थी वो समझ गई के (john v kantakouzenos) किसके बल बुते पे ये बगावत कर रहा हे, तो उसने भी तुर्को ही के एक दूसरे इंतिहाई ताकतवर धड़े केराशी सल्तनत से मदद मांगी, ये अलग बात हे के केरासी से उन्हें जादा मदद नही मिली,*

*अब रोमी सल्तनत में खाना-जंगी सुरु होगई*
 जिसमे एक तरफ तुर्क ओर रूमी जनरैल (kantakouzenos) एक साथ थे ,
*जबकि दूसरी तरफ*
 रोमी शहनशाह , 
सर्बिया , (serbia) ओर
बुल्गारिया , (Bulgaria) वगैराह साथ थे और 
केराशी ,(karasi) तुर्क सल्तनत भी 
*6 साल तक जारी रहने वाली खाना जंगी के बाद  (john v kantakouzenos)  को कुस्तुन्तुनिया का शरिक शहनशाह बना लिया गया यानी वो जंग जीत गया*

लेकिन इस खाना जंगी ने ब्रेजेंटाइन सल्तनत के टुकड़े कर दिए , सर्बिया , आज़ाद हो गया ,बुल्गारिया, ने कई हिस्सों पे कब्ज़ा कर लिया और बाद में ब्रेजेंटाइन सल्तनत सिर्फ कुस्तुन्तुनिया में महदूद होकर रह गई

*इस जंग से उस्मानियो का असर ओर रसुक अपनी सबसे बड़ी दुश्मन सल्तनत में अंदर तक हो गया, बल्के उस्मानि सुल्तान का ससुर ,रुमिओ का शरिक शहनशाह बन गया , उस्मानियो के लिए ये बड़ी कामयाबी थी इसपर मजीद ये की वो अब मगरिब मे केरासी तुर्को पर भी हावी हो गए थे , जो उनके बड़े दुश्मन थे*
*केरासी सल्तनत धीरे धीरे खत्म हो गई*

*केरासी सल्तनत पर कब्ज़े की वजह से उस्मानी तुर्क समुंदर के उस हिस्से दरया ए दानियाल के करीब आगए थे , जहा से वो योरोप में दाखिल हो सकते थे, क्यों के अनातोलिया से योरोप के दोही रास्ते थे एक कुस्तुन्तुनिया ,दूसरा यही दरिया ए दानियाल का था, योरोप में दाखिल होना उसको फतेह करना तुर्को के लिए एक खुवाब था, ये खुवाब उनके बानी गाज़ी उस्मान बे ने देखा था, ओर अब वो इसके किनारे पे थे, लेकिन दरमियान में एक समुंदर था , ओर दूसरी तरफ यूरोप की ताकतवर फ़ौज़ थी*


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*📮आगे इन शा अल्लाह अगली पोस्ट में*

*✍🏻मोहम्मद शोएब*

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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