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दावत क़ुबूल करना सुन्नत है!

दावत क़ुबूल करना सुन्नत है!
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हदिश : हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है। कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया....
"जब तुम मे से किसी को वलीमा खाने के लिए बुलाया जाए तो वह जरूर जाए"
बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 87, मोता इमाम मालिक, जिल्द नं 2, सफा नं 434
हदिस: हजरत अबु हुरैरा रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है के रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया....
"जो दावत कबुल करके न जाए उसने अल्लाह तआला और रसुल की नाफरमानी की"!
हदिस: हजरत हमीद बिन अब्दुर्रहमान हुमारी रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है के रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया....
"जब दो शख्स दावत देने एक वक्त आए, ते जिसका घर तुम्हारे घर से करीब हो उसकी दावत कबुल करो, और अगरलअक पहले आया तो जो पहले आया उसकी दावत कबुल करो "!
इमाम अहमद, अबु दाऊद शरीफ जिल्द नं 3, बाब नं 136, हदिस नं 357 सफा नं 134
बगैर दावत जाना
"दावत में बगै़र बुलाए नही जाना चाहिए। आज कल आम तौर पर कई लोग दावतों में बिन बुलाए ही चले जाते है और उन्हें न शर्म ही आती है न ही अपनी इज़्ज़त का कुछ ख़्याल होता है गोया....... मान न मान मै तेरा मेहमान"
हदीस :सरकारे मदीना ﷺ ने इरशाद फ़रमाया......
दावत में जाओ जब के बुलाए जाओ"! और फरमाया.....
जो बग़ैर बुलाए दावत में गया वोह चोर होकर दाखील हुआ और गारतगीरी कर के लुटेरे की सूरत में बाहर निकला!
यानी गुनाहो को साथ लेकर निकला
अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 127, हदीस नं 342, सफा नं 130
बुरा वलीमा
हदीस पाक में उस वलीमें को बहुत बुरा बताया गया है । जिस में सब अमीरो को तो बुलाया जाए और गुरबा (गरीब) व मसाकीन को फरामोश (भुला दिया जाए) या उनके लिये अलग किस्म का खाना और अमीरों के लिए अलग क़िस्म का खाना रखा जाए। या अमीरो की खुब खातीर तवाजु की जाए और गरीबो को नजर अंदाज कर दिया जाए, या उन्हे हिकारत की नजर से देखा जाए!
हदीस: हज़रत अबू ह़ुरैरा रदि अल्लाहु तआला अन्हु रिवायत करते है रसूले ख़ुदा ﷺ ने इरशाद फरमाया....
"सब से बुरा वलीमा का वह खाना है जिस में अमीरों को तो बुलाया जाए और गरीबों को नज़र अंदाज़ कर दिया जाए"
बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 88, मोता शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 434
आजकल मुसलमानो मे एक नया रिवाज पैदा हुआ है के दावत मे दो किस्म के खाने होते है! सादा व कम लागत वाला खाना गरीब मुसलमानो के लिये और बेहतरीन खाना अमीर मुसलमान और गैर मुस्लीम दोस्तो के लिये रखे जाते है! और इस तरह खातीर तवाजु की जाती है के पुछिये मत

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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