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🌹दरसे तसव्वूफ और हिकायाते 🌹

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                 باب १८: فضیلتِ رحم   ▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬ 

हदीस शरीफ़ में है एक दिन जिबरील ए अमीन हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाजिर हुए और कहा मैंने आसमानों पर एक ऐैसा फरिश्ता देखा जो तख्त नशीन था और सत्तर हजार फरिश्ते सफ बसता उस की खिदमत में हाजिर थे, उस के हर सांस से अल्लाह तआला एक फरिश्ता पैदा फरमाता है, अभी अभी मैंने उसे शिकस्ता परों (टूटे हुए पर) के साथ कोह ए का़फ में रोते हुए देखा है, जब उसने मुझे देखा तो कहा तुम अल्लाह तआला के हुजूर मेरी सिफारिश करो। मैंने पूछा तेरा जुर्म क्या है? उसने कहा मेराज की रात जब मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की सवारी गुजरी तो मैं तख्त पर बैठा रहा ताजीम के लिए खड़ा नहीं हुआ, इसलिए अल्लाह तआला ने मुझे इस जगह इस अजाब में मुब्तिला कर दिया है जीब्रील ए अमीन ने कहा मैंने अल्लाह तआला की बारगाह में रो रो कर उस की सिफारिश की, अल्लाह तआला ने मुझसे फरमाया तुम उस से कहो कि यह मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम पर दुरूद भेजे , चुनानचे  उस फरिश्ता ने आप पर दुरूद भेजा तो अल्लाह तआला ने उस की उस लगजिश को माफ कर दिया और उसके नऐ पर भी पैदा फरमा दिए।


[ से व्युत्पन्न:  मुकाशेफतुल कुलूब उर्दू पृष्ठ संख्या  १५२  प्रकाशक : रजवी किताब घर

हजरते मालिक बिन अनस रजियल्लाहु अन्हो से मरवी है, हुजूर सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया तुम पर मुसलमानों के चार हुक़ूक़ हैं अपने मुहसिन की इमदाद करो, गुनाहगार के लिए मगफिरत तलब करो, मरीज की अयादत करो, और तौबा करने वाले को दोस्त रखो।

      रिवायत है कि हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला से सवाल किया ऐै अल्लाह!  तूने मुझे किस वजह से सफी बनाया है? रब तआला ने फरमाया मखलूक पर तेरे रहम करने की वजह से।

      हजरते अबूद्र्दा रजियल्लाहु अन्हो बच्चों से चिड़िया खरीदकर उन्हें छोड़ देते और फरमाते: जाओ आजादी की जिंदगी बसर करो।

       फरमान ए नबवी है कि रहमत, शफ्कत, और मोहब्बत में तमाम मुसलमान एक जिस्म की तरह हैं, जब जिस्म का कोई उज्व (हिस्सा) तकलीफ में मुब्तिला हो जाता है तो सारा जिस्म उस दर्द और तकलीफ में मुब्तिला हो जाता है।

      हिकायत बनी इसराइल पर सख्त क़हत (सूखा) का जमाना था, एक आबिद का रेत के टीले से गुजर हुआ तो उसके दिल में ख्याल आया काश यह रेत का टीला आंटे का टीला होता और मैं इस से बनी इसराइल के पेट भरवाता, अल्लाह तआला ने बनी इस्राइल के नबी की तरफ वही भेजी, मेरे उस बंदे से कह दो कि तुझे इस टीले के बराबर बनी इसराइल को आंटा खिलाने से जितना सवाब मिलता हमने तुम्हारी उस नियत की बदौलत ही उतना सवाब दे दिया है, इसीलिए फरमाने नबवी है, मोमिन की नीय्यत उसके अमल से बेहतर है।

[ से व्युत्पन्न:  मुकाशेफतुल कुलूब उर्दू पृष्ठ संख्या  १४८  प्रकाशक : रजवी किताब घर ]


हजरते ईसा अलैहिस्सलाम एक मर्तबा कहीं जा रहे थे, आपने शैतान को देखा एक हाथ में शहद और दूसरे में राख लिए जा रहा था, आपने पूछा ऐै दुश्मन ए खुदा!  यह शहद और राख तेरे किस काम आती है?  शैतान ने कहा शहद गीबत करने वालों के होंठों पर लगाता ताकि वह और आगे बढ़ें, राख यतीमों के चेहरों पर मलता हूं ताकि लोग उनसे नफरत करें।

      हुजूर सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने फरमाया जब यतीम को दुख दिया जाता है तो उसके रोने से अल्लाह तआला का अर्श कांप जाता है और रब्बे जुलजलाल फरमाता है ऐै फरिश्तो!  उस यतीम को जिसका बाप मनो मिट्टी तले दफन हो चुका है किसने रुलाया है? 

      हुजूरे अनवर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का इरशाद है कि जिसने यतीम के लिबास व तआम(खाना कपड़ा) की जिम्मेदारी ले ली अल्लाह तआला ने उसके लिए जन्नत को वाजिब कर दिया।   रौजतुलओलमा में है कि हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम खाने से पहले मील दो मील का चक्कर लगाकर मेहमानों को तलाश किया करते थे।  एक मर्तबा हजरते अली कर्ममल्लाहु वजहहू रो पड़े, पूछा गया आप क्यों रोए?  आपने फ़रमाया एक हफ्ता गया, मेरे हां कोई मेहमान नहीं आया, शायद अल्लाह तआला मुझसे खुश नहीं है।

    फरमाने नबवी है जो किसी भूखे को फीसबीलिल्लाह खाना खिलाता है उसके लिए जन्नत वाजिब हो जाती है और जिसने किसी भूखे से खाना रोक लिया अल्लाह तआला कयामत के दिन उस शख्स से अपना फजलो करम रोक लेगा और उसे अजाब देगा।

[ से व्युत्पन्न:  मुकाशेफतुल कुलूब उर्दू पृष्ठ संख्या  १४९/१५०  प्रकाशक : रजवी किताब घर ]


फरमान ए नबवी है: सखी अल्लाह तआला, जन्नत, और लोगों के करीब होता है, और जहन्नम से दूर होता है, बखीलल अल्लाह तआला जन्नत और लोगों से दूर होता है और जहन्नम से करीब होता है, फरमाने ए नबवी है: कि जाहिल सखी अल्लाह तआला को आबिद बखील से ज्यादा पसंद है फरमान ए नबवी है कि क्यामत के दिन चार शख्स बिला हिसाब जन्नत में दाखिल होंगे, अलिमे बा अमल हाजी, जिसने हज के बाद मौत तक गुनाहों का इरतिकाब न किया, शहीद जो अल्लाह के कलेमा को बुलंद करने के लिए मैदान-ए-जंग में मारा गया, सखी जिसने माले हलाल कमाया और अल्लाह की रजा जूइ में खर्च कर दिया, यह लोग एक दूसरे से इस बात पर झगड़ेंगे कि जन्नत में पहले कौन दाखिल होता है।

     हज़रते इब्ने अब्बास रजिअल्लाहु अन्हो से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने फरमाया: अल्लाह ने अपने बाज(कुछ) बंदों को मालो दौलत से मालामाल कर दिया ताकि लोगों को फायदा पहुंचाते रहें जो शख्स फायदा पहुंचाने में पसोपेश करता है अल्लाह तआला उसकी दौलत किसी और को दे देता है।

     फरमान ए नबवी है: सखावत बहिश्त(जन्नत) का एक दरख्त है उसकी साखें जमीन पर झुकी हुई हैं जिसने उसकी किसी शाख को थाम लिया वह उसे जन्नत में ले जाएगी।

    हजरते जाबिर रजियल्लाहु अन्हो से मरवी है, हुजूर सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम से पूछा गया कि कौन सा अमल अफजल है?  आपने फरमाया सब्र और सखात।

     हजरते मिकदाम बिन शुरैह रहमतुल्लाह अलैह अपने वालिद और अपने जद(दादा) से रिवायत करते हैं, उनके दादा ने हुजूर की खिदमत में अर्ज की कि मुझे ऐैसा अमल बतलाइऐ  जो मुझे जन्नत का मकीन बना दे। आपने फरमाया मगफिरत के असबाब में से खाना खिलाना, सलाम करना, और खुश अखलाकी है।

[ से व्युत्पन्न:  मुकाशेफतुल कुलूब उर्दू पृष्ठ संख्या  १५०१५१  प्रकाशक : रजवी किताब घर ]


About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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